हिफाजत-ए-इस्लाम (Hefazat-e-Islam) का सीधे तौर पर किसी राजनीतिक पार्टी से तालुक नहीं है। यह कट्टरपंथी संगठन कौमी मदरसों के जरिए संचालित होता है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की बांग्लादेश (Bangladesh) यात्रा के दौरान विरोध प्रदर्शन करने के पीछे पाकिस्तान का हाथ सामने आया है। पाकिस्तान कट्टरपंथियों को फंड देने के साथ उनकी हर तरह से मदद कर रहा है। बता दें कि बांग्लादेश के 50 साल पूरे होने और बांग्लादेश के फादर ऑफ द नेशन शेख मुजीबुर्रहमान के जन्मदिवस पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पीएम मोदी बीते दिनों बांग्लादेश गए थे।
पीएम मोदी (PM Narendra Modi) के इस दौरे के बाद से ही वहां अलग-अलग जगहों पर हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बीच इसे लेकर बांग्लादेश की पार्लियामेंट ने एक ट्वीट भी किया था, जिसमें पाकिस्तान हाई कमीशन और कट्टरपंथी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम (Hefazat-e-Islam) के बीच संबंध को बताया गया था।
बांग्लादेश की पार्लियामेंट ने लिखा था, “हिफाजत-ए-इस्लाम को पाकिस्तान हाई कमीशन ढाका फंड मुहैया करवा रहे हैं, जिसकी वजह से भारत और पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रदर्शन किया जा सके, लेकिन हम साफ कर दें कि हम सेकुलर और लोकतांत्रिक देश हैं, जो इस तरह के कृत्य की निंदा करते हैं।”
हालांकि इसके कुछ देर बाद ही, ये ट्वीट डिलीट कर दिया गया और अगले ट्वीट में कहा गया कि पाकिस्तान का कृत्य शर्मनाक है। गौरतलब है कि बांग्लादेश में किए गए हिंसक विरोध प्रदर्शन के मामलों में करीब 14 हजार लोगों को आरोपी बनाया गया है। विरोध के दौरान हुई हिसा में 14 लोग मारे गए हैं, इनमें से 10 ब्राहणबेरिया के और 4 चटगांव के हैं।
बता दें कि हिफाजत-ए-इस्लाम (Hefazat-e-Islam) का सीधे तौर पर किसी राजनीतिक पार्टी से तालुक नहीं है। यह कट्टरपंथी संगठन कौमी मदरसों के जरिए संचालित होता है। यह कट्टरपंथी संगठन कौमी मदरसों के जरिए संचालित होता है। बांग्लादेश में 14 हजार कौमी मदरसे है, जिसमें करीब 14 लाख बच्चे तालीम हासिल करते हैं। मौलाना अहमद सैफी, हिफाजत-ए-इस्लाम के बड़े लीडर थे, जिनकी मौत सितंबर, 2020 में हो गई थी।
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उनका प्रधानमंत्री शेख हसीना से बहुत अच्छा संबंध था। सैफी के निधन के बाद हिफाजत पर बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी का कंट्रोल हो गया। जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान समर्थक राजनीतिक पार्टी है, जमात हमेशा 1971 में बांग्लादेश को मिली स्वतंत्रता के खिलाफ रही है। हालांकि उसके चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन जमात विपक्षी पार्टी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के प्रमुख सहयोगियों में से एक है।